CTET Syllabus in Hindi

CTET Paper 1 Syllabus in Hindi-

सबसे पहले बात करते हैं कि CTET Exam pattern 2020 of paper 1 क्या है, तो इसको समझने के लिए निचे दिए गए चित्र में समझें

1 - CTET Child Development & Pedagogy Syllabus 2020


Child development & Pedagogy (बाल विकास और अध्यापन ): इस भाग में कुल 30 प्रश्न होते हैं, जो तीन भाग में बाँट कर पूछा जाता है -
(A) बाल विकास (Child Development)  (15 प्रश्न ):
  • विकास की अवधारणा और इसका सीखने के साथ संबंध  (Development Concepts and its relationship with learning)
  • आनुवंशिकता और पर्यावरण का प्रभाव  (Influence of Heredity and Environment)
  • बच्चों के विकास के सिद्धांत  (Principles of the development of children)
  • समाजीकरण की प्रक्रिया: सामाजिक दुनिया और बच्चों (शिक्षक, माता पिता,एवं साथी)  (Socialization Processes: Social World and Children (Teacher, Parents and Peers))
  • बौद्धिक विकास के लिए गुणात्मक विवेचन (Critical perspective of the construct of Intelligence)
  • बच्चों को केंद्रित करते हुए प्रगतिशील शिक्षा की अवधारणा  (Concepts of Child Oriented and Progressive Education)
  • चहुँ ओर बौद्धिक विकास  (Multidimensional Intelligence)
  • भाषा और विचार (Language & Thought)
  • एक सामाजिक निर्माण के रूप में ; लिंग भूमिकाओं, लिंग-पूर्वाग्रह,  लिंगी भेद और शैक्षिक अभ्यास ( Gender as a social construct: Gender Roles, Gender Bias and Educational Practice)
  • सीखने और सीखने के आकलन, नजरिए और व्यवहार के बीच भेद,  स्कूल आधारित मूल्यांकन, सतत एवं व्यापक मूल्यांकन   (Distinction Between Assessment for learning and assessment of Learning; Continuous & Comprehensive Evaluation, School Based Assessment, Perspective and Practice),
  • शिक्षार्थियों की तत्परता के स्तर के आकलन करने के लिए;  Formulating appropriate questions for assessing readiness levels of learners
  • सीखने और कक्षा में महत्वपूर्ण सोच को बढ़ाने के लिए और शिक्षार्थी की उपलब्धि का आकलन करने के लिए उचित प्रश्नों का प्रतिपादन
(B) समावेशी शिक्षा की अवधारणा और बच्चों की समझ का आकलन  (Concept of Inclusive Education and Understanding Children with Special Needs) (05 प्रश्न):
    • बुद्धिमान, रचनात्मक, विशेष रूप से विकलांग शिक्षार्थियों का संबोधन ,(Addressing the Creative, Talented, specially abled Learners)
    • सीखने की कठिनाइयों, दुर्बलता आदि के साथ बच्चों की जरूरतों का संबोधन  (Addressing the requirements of children with learning difficulties ‘impairment’, etc)
  • विभिन्न पृष्ठभूमि से संबंध रखते शिक्षार्थी सुविधाहीन और वंचित शिक्षार्थियों को पढ़ना  (Addressing learners from diverse backgrounds including the Deprived and Disadvantaged)
(C) शिक्षा और अध्यापन  (Learning and Pedagogy): 10 प्रश्न :
  • कैसे बच्चे सोचते और सीखते हैं; कैसे और क्यूँ वे स्कूल में सफलता प्राप्त करने में असफल होते हैं | (How children think and learn, How and why children failed to achieve success in school performance)
  • शिक्षण और सीखने की बुनियादी प्रक्रियाओं Basic processes of teaching and learning ;
  1.  सीखने के बच्चों की रणनीति
  2. एक सामाजिक गतिविधि के रूप में सीख;
  3. शिक्षा का सामाजिक संदर्भ
  • समस्या का हल निकलने वाले (एक ‘वैज्ञानिक अन्वेषक’ के रूप में बच्चे) Child as a problem solver (and a ‘scientific investigator)
  • सीखने के लिए योगदान के कारक (व्यक्तिगत और पर्यावरण)  (Factors contributing to learning)  personal and environmental
  • प्रेरणा और सीख  (Motivation and Learning)
  • अनुभूति और भावना  (Cognition and Emotions)
  • बच्चों में सीखने की वैकल्पिक धारणाएं-सीखने की प्रक्रिया में बच्चों की ‘त्रुटियों’ को महत्वपूर्ण कदम के रूप में समझना

CTET Mathematics Syllabus in Hindi 

सीटेट में गणित विषय के भाग में कुल 30 प्रश्न पूछे जाते हैं, इसमें भी दो भाग में प्रश्न पूछे जाते हैं, विषय से 20 प्रश्न और शिक्षण तकनिकी से 10 प्रश्न | इस प्रश्नों का स्तर कक्षा 10 तक का होता है |
गणित विषय का पाठ्यक्रम  (20 प्रश्न ):
    • संख्या पद्धति  (Number System ) –
  1. नंबरों को जानना (Knowing our numbers),
  2. नंबरों के साथ खेलना  (Playing with Numbers),
  3. पूर्ण संख्या  (Whole Numbers),
  4. ऋणात्मक संख्या और पूर्णांक (Negative Numbers and Integers)
  5. भिन्न (Fractions)
    • बीजगणित (Algebra) –
  1. बीजगणित का परिचय (Introduction to Algebra),
  2. अनुपात समानुपात  (Ration and Proportion)
  • ज्यामिति ( Geometry ) –
  1. बेसिक ज्यामिति विचार (2-D) (Basic Geometry Ideas 2-D),
  2. आकार और स्थानिक समझ Understanding Elementary Shapes (2-D, 3-D)
  3. समरूपता - प्रतिबिंब, निर्माण (Symmetry – Reflection, Construction)
  4. Using Straight Edge Scale, Protractor, Compass
  • Mensuration (क्षेत्रमिति) –
  1. क्षेत्र (Sphere)
  2. शंकु (Cone),
  3. सिलेंडर (Cylinder ),
  4. त्रिकोण (Triangles),
  5. वृत्त (Circle),
  6. आयत (Rectangle),
  7. वर्ग (Square), आदि...
  • डाटा हैनडलिंग (Data Handling )-
  • अंकगणित (Arithematics)
  1. काम - समय  (Time & work)
  2. दूरी (Distance) ,
  3. लाभ और हानि (Profit and Loss) ,
  4. साधारण और चक्रवृद्धि ब्याज (Simple and Compound Interest)
  5. समय और काम आदि
Pedagogical Issues (10 प्रश्न):
  • गणित की प्रकृति / तार्किक सोच; बच्चों की सोच और तर्क पैटर्न, अर्थ और शिक्षा बनाने की रणनीतियों को समझना (Nature of Mathematics/ Logical Thinking )
  • सामुदायिक गणित  (Community Mathematics)
  • सिलेबस में गणित का स्थान  (Place of Mathematics in Curriculum)
  • औपचारिक और अनौपचारिक तरीकों के माध्यम से मूल्यांकन  (Evaluation through formal and informal methods)
  • गणित की भाषा (Language of Mathematics)
  • उपचारात्मक शिक्षण (Diagnostic and Remedial Teaching)

CTET Language I (Hindi) Syllabus 2020

भाषा समझ (15 प्रश्न) : इसमें दो अनुच्छेद दिए जायेंगे जो एक गद्य या नाटक और एक कविता का अनुच्छेद होगा, इसमें से आपके समझ पर प्रश्न पूंछे जाते है जिसमे, हिंदी व्याकरण, अनुमान और शाब्दिक क्षमता से सम्बंधित प्रश्न भी होते है |
भाषा विकास का अध्यापन – (15 प्रश्न)
  • अधिगम और अधिग्रहण
  • भाषा शिक्षण के सिद्धांत
  • सुनने और बोलने की भूमिका; भाषा के प्रयोग और कैसे बच्चों इसका एक माध्यम के रूप में प्रयोग करते हैं
  • भाषा को सीखने और अपने विचारों को मौखिक या लिखित रूप में व्यक्त करने के में व्याकरण की भूमिका
  • विभिन्न कक्षाओं में भाषा के शिक्षण की चुनौतियाँ;
  • भाषा की कठिनाइयाँ,
  • भाषा की त्रुटियां और विकार
  • भाषा कौशल
  • भाषा समझ और प्रवीणता का मूल्यांकन: बोलने, सुनने, पढ़ने और लिखने के द्वारा
  • उपचारात्मक शिक्षण
  • शिक्षण अधिगम सामग्री: पाठ्यपुस्तक, मल्टी मीडिया सामग्री, कक्षा के बहुभाषी संसाधन

CTET Language II (English) Syllabus 2020 

इसमें भी दो paragraph होते हैं जो एक prose और एक poetry से होता है, इसमें से आपके समझ पर प्रश्न पूंछे जाते है जिसमे, grammar and verbal ability inference से सम्बंधित प्रश्न होते है | Passage will be following types – Discursive or literary or narrative or scientific, etc.
Pedagogy of Language Development (15 Questions):
It will cover questions from the following topics:
  • Principles of Language Teaching
  • Role of speaking & listening; Function of Language and how children use it as a tool
  • Learning and Acquisition
  • Evaluation of Language comprehension and proficiency: listening, speaking, writing, and reading.
  • Challenges of teaching language in a diverse classroom; language difficulties, errors and disorders
  • A critical perspective on the role of grammar in learning a language for communicating ideas verbally and in written forms
  • Remedial Teaching
  • Teaching Learning Materials: Text Books, Multimedia materials, multilingual resources of the classroom

CTET Environmental Studies Syllabus 2020

Content: (20 प्रश्न)
  • परिवार और मित्र (Family and Friends) 
  1. रिश्ते (Relationships),
  2. कार्य और खेल (Work and Play)
  3. जानवर (Animals)
  4. पौधे (Plants)
  • भोजन  (Food)
  • पानी (Water)
  • घर  (Shelter)
  • यात्रा  (Travel)
  • चीजें जो हम करते हैं  (Things we make and do)
Pedagogical Issues: (10 Questions)
  • EVS की अवधारणा और क्षेत्र (Concept and scope of EVS)
  • अवधारणाओं को पेश करने के लिए दृष्टिकोण, (Significance of EVS integrated EVS)
  • विज्ञान और सामाजिक विज्ञान से संबंध और क्षेत्र (Scope & relation to Science and Social Science)
  • अवधारणाओं को पेश करने के लिए दृष्टिकोण (Approaches to presenting concepts)
  • क्रियाएँ (Activities)
  • प्रयोग / व्यावहारिक कार्य (Experimentation/Practical Work)
  • सीखने के सिद्धांत (Learning Principles)
  • शिक्षण अधिगम सामग्री की समस्या (Teaching Material/Aids Problems)
  • विचार-विमर्श (Discussion)
  • पर्यावरण अध्ययन और पर्यावरण शिक्षा (Environmental Studies & Environmental Education)
इस प्रकार आपने Paper 1 के सभी भाग का पाठ्यक्रम ऊपर बताया गया है |

CTET Paper 2 Syllabus in Hindi 


सबसे पहले बात करते हैं कि CTET Exam pattern 2020 of paper 2 क्या है, तो इसको समझने के लिए निचे दिए गए चित्र में समझें

CTET General Science Syllabus 2020

Content: (20 Questions)
  • Food: Source of Food, Components of Food, Cleaning Food
  • Materials: Materials of Daily Use
  • The World of the living
  • Natural Phenomena
  • Moving Things People and Ideas
  • Natural Resources
  • How Things Work: Magnets, Electric Current, and Circuits.
Pedagogical Issues (10 Questions):
  • Natural Science (Aims and its Objectives)
  • Nature and Structure of Sciences
  • Understanding and Appreciating Science
  • Approaches/Integrated Approach
  • Innovations
  • Remedial Teaching
  • Text Materials/ Aids
  • Problems
  • Evaluation cognitive/ effective/ psychometric
  • Observation/ Experiment/ Discovery (Method of Science)

CTET Social Sciences/ Social Studies Syllabus 2020

From History, Geography, Social, and Political Life Section – 40 questions will be asked. Total marks for Social Studies is 60 marks. Other 20 marks for Pedagogical Issues topics in Social Studies.
History:
  • The Earliest Societies
  • When, Where and How
  • The First Farmers and Herders
  • First Cities
  • Early States
  • The First Empire
  • New Ideas
  • Contacts with Distant Lands
  • Culture and Science
  • Political Developments
  • New Kings and Kingdoms
  • Architecture
  • Sultans of Delhi
  • Social Change
  • Creation of an Empire
  • Regional Cultures
  • Rural Life and Society
  • The Establishment of Company Power
  • Colonialism and Tribal Societies
  • Regional Cultures
  • The Revolt of 1857-58
  • Challenging the Caste System
  • Indian After Independence
  • Women and Reform
  • The National Movements
Geography:
  • Agriculture
  • Human Environment: Settlement, Transport, and Communication
  • Planet: Earth in the Solar System
  • Resources: Type of Resources (Natural/Human)
  • The environment in its Totality: Natural and Human Environment
  • Air
  • Water
  • Globe
  • Geography as a social study and as science
Social and Political Life:
  • Government
  • Diversity
  • Local Government
  • Democracy
  • Making a living
  • State Government
  • Unpacking Gender
  • Understanding Media
  • Indian Constitution Understanding
  • The Judiciary
  • Parliamentary Government
  • Social Justice and Marginalized
Pedagogical Issues:
  • Sources – Primary and Secondary Types
  • Concept and Nature of Social Studies
  • Class Room Processes,
  • Activities and Discourse
  • Developing Critical Thinking
  • Evaluation
  • Inquiry / Empirical Evidence
  • Projects Work
  • Problems of Teaching Social Science/ Social Studies

समावेशी शिक्षा की अवधारणा और विशेष आवश्यकताओं वाले बच्चों को समझना: CTET 2020 Syllabus in Hindi Download

  • वंचित और वंचित सहित विभिन्न पृष्ठभूमि
  • सीखने की कठिनाइयों, ‘हानि’ आदि वाले बच्चों की जरूरत को समझना
  • प्रतिभाशाली, रचनात्मक, विशेष रूप से प्रतिभावान शिक्षणनार्थी की आवशयकताओ को समझना

सीखना और अध्यापन: सीटेट प्रवेश परीक्षा 2020 पाठ्यक्रम/CTET Exam Syllabus in Hindi

  • बच्चे कैसे सोचते हैं और सीखते हैं; स्कूल प्रदर्शन में सफलता प्राप्त करने के लिए बच्चे कैसे और क्यों विफल हो जाते हैं।
  • शिक्षण और सीखने की बुनियादी प्रक्रियाएं; बच्चों की रणनीतियों; एक सामाजिक गतिविधि के रूप में सीखना; सीखने का सामाजिक संदर्भ।
  • समस्या हल करने वाले और एक ‘वैज्ञानिक जांचकर्ता’ के रूप में बच्चे
  • बच्चों में सीखने की वैकल्पिक धारणाएं, सीखने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण कदमों के रूप में बच्चों की ‘त्रुटियों’ को समझना।
  • ज्ञान और भावनाएं
  • प्रेरणा और सीखना
  • सीखने में योगदान करने वाले कारक – व्यक्तिगत और पर्यावरण

भाषा विकास की अध्यापन : CTET Syllabus in Hindi

  • सीखना और अधिग्रहण
  • भाषा शिक्षण के सिद्धांत
  • सुनने और बोलने की भूमिका; भाषा का कार्य और बच्चे इसे टूल के रूप में कैसे उपयोग करते हैं
  • मौखिक रूप से और लिखित रूप में विचारों को संचारित करने के लिए एक भाषा सीखने में व्याकरण की भूमिका पर महत्वपूर्ण परिप्रेक्ष्य
  • एक विविध कक्षा में शिक्षण भाषा की चुनौतियां; भाषा कठिनाइयों, त्रुटियों और विकार
  • भाषा कौशल, समझ और प्रवीणता का मूल्यांकन करना: बोलना, सुनना, पढ़ना और लिखना
  • शिक्षण-शिक्षण सामग्री: पाठ्यपुस्तक, बहु-मीडिया सामग्री, कक्षा के बहुभाषी संसाधन
  • रेमेडियल टीचिंग

शिक्षा में खेल - कूद का स्थान 

अन्य सम्बन्धित शीर्षक


  •  स्वास्थ्य शिक्षा की उपादेयता ( 2004 ) , 
  • व्यायाम का महत्त्व 
  • स्वस्थ तन , स्वस्थ मन
  • जीवन में खेलकद की आवश्यकता और स्वरूप ( 2000 ) 
  •  स्वास्थ्य शिक्षा : आवश्यकता एवं महत्त्व ( 2005 ) ।

 “ अपने विगत जीवन पर दृष्टि डालते हए मझे सोचना पडता है कि खेल - कूद के प्रति लापरवाही नहीं दिखानी चाहिए थी । ऐसा करके मैंने शायद असमय प्रौढ़ता की भावना विकसित कर ली । " - सुभाषचन्द्र बोस

निबन्ध - रचना रूपरेखा - ( 1 ) प्रस्तावना , ( 2 ) जीवन में स्वास्थ्य का महत्त्व ,  ( 3 ) शिक्षा और क्रीडा का सम्बन्ध , ( 4 ) क्रीडा एवं व्यायाम के विभिन्न प्रकार वाभन्न प्रकार , ( 5 ) शिक्षा में क्रीडा एवं व्यायाम का महत्त्व - ( क ) शारीरिक विकास , शिक्षा ( ख ) मानासक विकास , ( ग ) नैतिक विकास . ( घ ) आध्यात्मिक विकास , ( ङ ) शिक्षा - प्राप्ति में हाच , ( 6 ) व्यायाम और शिक्षा का समन्वय , ( 7 ) उपसंहार ।

( 1 ) प्रस्तावना - 


खेल  मनुष्य की जन्मजात प्रवृत्ति है । यह प्रवृत्ति बालकों , युवकों और वृद्धों तक में पाई जाती है । जो बालक अपनी बाल्यावस्था में खेलों में भाग नहीं लेता , वह बहुत - सी बातें सीखने से वंचित रह जाता ह उसक व्यक्तित्व का भली प्रकार विकास नहीं हो पाता । हमारे पूर्वजों ने मानव - जीवन को 100 वर्ष का माना था । इसमें प्रथम 25 वर्ष विद्याध्ययन एवं शारीरिक पष्टि के लिए निर्धारित किए गए थे । विद्यार्थी अपने अध्ययन - काल म ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए शरीर को पुष्ट बनाते एवं विद्याध्ययन करते थे । इस बात की पुष्टि निम्नलिखित श्लोक स होती है प्रासादस्य विनिर्माणे मूलभित्तिरपेक्षते । तथैव जीवनस्यादौ ब्रह्मचर्यमपेक्षते ॥ अर्थात् जिस प्रकार किसी भवन का निर्माण करने के लिए सुदढ़ नींव की आवश्यकता होती है , उसी प्रकार जीवन के आरम्भ में ब्रह्मचर्य एवं शरीर - पुष्टि की आवश्यकता होती है ।
जीवन में स्वास्थ्य का महत्त्व - स्वास्थ्य जीवन की आधारशिला है । स्वस्थ मनुष्य ही अपने जीवन सम्बन्धी कार्यों को भली - भाँति पूर्ण कर सकता है । हमारे देश में धर्म का साधन शरीर को ही माना गया है । अतः कहा गया है - ' शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम् ' । इसी प्रकार अनेक लोकोक्तियाँ भी स्वास्थ्य के सम्बन्ध में प्रचलित हो गई हैं ; जैसे - ' पहला सुख नीरोगी काया ' , ' तन्दुरुस्ती हजार नियामत है ' , ' जान है तो जहान है ' आदि । इन सभी लोकोक्तियों का अभिप्राय यही है कि मानव को सबसे पहले अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना चाहिए । भारतेन्दुजी ने कहा था दूध पियो कसरत करो , नित्य जपो हरि नाम । हिम्मत से कारज करो , पूरेंगे सब राम । । यह स्वास्थ्य हमें व्यायाम अथवा खेल - कूद से प्राप्त होता है ।

 शिक्षा और क्रीडा का सम्बन्ध - 


यह निर्विवाद रूप से कहा जा सकता है कि शिक्षा और क्रीडा का अनिवार्य सम्बन्ध है । शिक्षा यदि मनुष्य का सर्वांगीण विकास करती है तो उस विकास का पहला अंग है - शारीरिक विकास । शारीरिक विकास व्यायाम और खेल - कूद के द्वारा ही सम्भव है । इसलिए खेल - कूद या क्रीडा को अनिवार्य बनाए बिना शिक्षा की प्रक्रिया का सम्पन्न हो पाना सम्भव नहीं है । अन्य मानसिक , नैतिक या आध्यात्मिक विकास भी परोक्ष रूप से क्रीडा और व्यायाम के साथ ही जुड़े हैं । यही कारण है कि प्रत्येक विद्यालय में पुस्तकीय शिक्षा के साथ - साथ खेल - कूद और व्यायाम की शिक्षा भी अनिवार्य रूप से दी जाती है । विद्यालयों में व्यायाम शिक्षक , स्काउट मास्टर , एन०डी०एस०आई० आदि शिक्षकों की नियुक्ति इसीलिए की जाती है कि प्रत्येक बालक उनके निरीक्षण में अपनी रुचि के अनुसार खेल - कूद में भाग ले सके और अपने स्वास्थ्य को सबल एवं पुष्ट बना सके ।
क्रीडा एवं व्यायाम के विभिन्न प्रकार - शरीर को शक्तिशाली , स्फूर्तियुक्त और ओजस्वी तथा मन को पर बनाने के लिए जो कार्य किए जाते हैं , उन्हें हम खेल - कूद , क्रीडा या व्यायाम कहते है । खेलकद और व्यायाम तीव गति से रक्त - संचार होता है ; अत : दोड़ , क्रिकेट , फुटबॉल , बैडमिण्टन , टेनिस , हॉकी आदि खेल इसी दष्टि से खेले जाते हैं । इन खेलों के लिए विशेष रूप से लम्बे - चौड़े मैदान की आवश्यकता होती है । अतः ये खेल सब लोग सभी स्थानों पर सुविधापूर्वक नहीं खेल सकत - है । वे अपने शरीर को पुष्ट करने के लिए कछ नियमित व्यायाम करते हैं : जैसे - प्रातः तथा साय खुली वायु में भ्रमण , दण्ड - बैठक लगाना , मुग्दर घुमाना , अखाडे में कश्ती के जोर करना एवं आसन करना आदि । इस प्रकार , खेल - कूद और व्यायाम का क्षेत्र अत्यधिक विस्तृत है और इनके विभिन्न रूप हैं ।

मात्रा में कीडा एवं व्यायाम का महत्त्व -
 संकुचित अर्थ में शिक्षा का तात्पर्य पस्तकीय ज्ञान प्राप्त करना मानसिक विकास करना ही समझा जाता है , लेकिन व्यापक अर्थ में शिक्षा से तात्पर्य केवल मानसिक विकास से नहीं है वरन शारीरिक , चारित्रिक और आध्यात्मिक विकास अर्थात् सर्वांगीण विकास से है । सर्वांगीण विकास के शारीरिक विकास आवश्यक है और शारीरिक विकास के लिए खेल - कूद और व्यायाम का विशेष महत्त्व है । शिक्षा के अन्य क्षेत्रों में भी खेल - कूद की परम उपयोगिता है , जिसे निम्नलिखित रूपों में जाना जा सकता है ।

( क ) शारीरिक विकास - शारीरिक विकास तो शिक्षा का मुख्य एवं प्रथम सोपान है , जो खेल - कट और के बिना कटापि सम्भव नहीं है । प्रायः बालक की पूर्ण शैशवावस्था भी खेल - कूद में ही व्यतीत होती है । बिना शिक्षा का और व्यास की शिक्षा खेल - कूद से शरीर के विभिन्न अंगों में एक सन्तलन स्थापित होता है . शरीर में स्फूर्ति उत्पन्न होती है , रक्त - संचार ठीक प्रकार से होता है और प्रत्येक अंग पुष्ट होता है । स्वस्थ बालक ता ह आर प्रत्येक अंग पुष्ट होता है । स्वस्थ बालक पुस्तकीय ज्ञान को ग्रहण करने की . . आधक क्षमता रखता है । अत : पुस्तकीय शिक्षा को सुगम बनाने के लिए भी खेल - कूद आर व्यायाम का आवश्यकता है ।

( ख ) मानसिक विकास - मानसिक विकास की दृष्टि से भी खेल - कूद अत्यन्त महत्त्वपूर्ण हैं । स्वस्थ शरीर हा स्वस्थ मन का आधार होता है । इस सम्बन्ध में एक कहावत भी प्रचलित है कि ' तन स्वस्थ तो मन स्वस्थ ' ( Healthy mind in a healthy body ) : अर्थात स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का वास होता हा शरार स दुबल व्यक्ति विभिन्न रोगों तथा चिन्ताओं से ग्रस्त हो मानसिक रूप से कमजोर तथा चिड़चिड़ा बन जाता है । वह जा कुछ पढ़ता - लिखता है , उसे शीघ्र ही भूल जाता है । अत : वह शिक्षा ग्रहण नहीं कर पाता । खेल - कूद से शारीरिक शक्ति में तो वृद्धि होती ही है , साथ - साथ मन में प्रफुल्लता , सरसता और उत्साह भी बना रहता है ।

( ग ) नैतिक विकास - बालक के नैतिक विकास में भी खेल - कूद का बहुत बड़ा योगदान है । खेल - कूद से शारीरिक एवं मानसिक सहन - शक्ति , धैर्य और साहस तथा सामूहिक भ्रातृभाव एवं सद्भाव की भावना विकसित होता है । बालक जीवन में घटित होनेवाली घटनाओं को खेल - भावना से ग्रहण करने के अभ्यस्त हो जाते हैं तथा शिक्षा - प्राप्ति के मार्ग में आनेवाली बाधाओं को हँसते - हँसते पार कर सफलता के सर्वोच्च शिखर पर पहुँच जाते हैं ।

 ( घ ) आध्यात्मिक विकास - खेल - कूद आध्यात्मिक विकास में भी परोक्ष रूप से सहयोग प्रदान करते हैं । आध्यात्मिक जीवन - निर्वाह के लिए जिन गुणों की आवश्यकता होती है , वे सब खिलाड़ी के अन्दर विद्यमान रहते हैं । योगी व्यक्ति सुख - दु : ख , हानि - लाभ अथवा जय - पराजय को समान भाव से ही अनुभूत करता है । खेल के मैदान में ही खिलाड़ी इस समभाव को विकसित करने की दिशा में कुछ - न - कुछ सफलता अवश्य प्राप्त कर लेते हैं । वे खेल को अपना कर्त्तव्य मानकर खेलते हैं । इस प्रकार आध्यात्मिक विकास में भी खेल का महत्त्वपूर्ण स्थान है ।

( ङ ) शिक्षा - प्राप्ति में रुचि - शिक्षा में खेल - कूद का अन्य रूप में भी महत्त्वपूर्ण स्थान है । आधुनिक शिक्षाशास्त्रियों ने कार्य और खेल में समन्वय स्थापित किया है । बालकों को शिक्षित करने का कार्य यदि खेल - पद्धति के आधार पर किया जाता है तो बालक उसमें अधिक रुचि लेते हैं और ध्यान लगाते है ; अत : खेल के द्वारा दी गई शिक्षा सरल , रोचक और प्रभावपूर्ण होती है । इसी मान्यता के आधार पर ही किण्डरगार्टन , मॉण्टेसरी , प्रोजेक्ट आदि आधुनिक शिक्षण - पद्धतियाँ विकसित हुई हैं । इसे ' खेल पद्धति द्वारा शिक्षा ( Education by play way ) कहा जाता है । अत : यह स्पष्ट है कि व्यायाम और खेलकूद के बिना शिक्षा के लक्ष्यों को प्राप्त करना असम्भव है ।

व्यायाम और शिक्षा का समन्वय - 

उपर्युक्त आधार पर यह स्पष्ट है कि शिक्षा में व्यायाम और खेल - कद का महत्त्वपूर्ण स्थान है । इसका अर्थ यह नहीं है कि खेल - कूद के समक्ष शिक्षा के अन्य अंगों की उपेक्षा कर दी जाए । आवश्यकता इस बात की है कि शिक्षा और खेल - कूद में समन्वय स्थापित किया जाए । विद्यार्थीगण खेल - कद और व्यायाम . से शक्ति का संचय करें , स्फूर्ति एवं ताजगी प्राप्त करें और इन सबका सदपयोग शिक्षा प्राप्त करने में करें । किसी भी एक कार्य को निरन्तर करते रहना ठीक नहीं है । इस सम्बन्ध में एक अंग्रेज कवि की उक्ति है Work while you work Play while youplay , That is the way To be happy and gay . अर्थात काम के समय मन लगाकर काम करो और खलन के समय मन लगाकर खेलो । जीवन में प्रसन्नता प्राप्त करने का एकमात्र यही तरीका है । बाई के समय खेल - कूद से दूर रहना चाहिए और खेल के समय प्रत्येक दृष्टि से चिन्तारहित होकर केवल खेलना ही चाहिए ।

 उपसंहार -

 व्यायाम और खेल - कूद से शरीर में शक्ति का संचार होता है . जीवन में का नगान में खेल के महत्त्व को स्वीकार कर लिया गया है । छोटे - छोटे बच्चों के स्कलों में भी खेल - कूद की समुचित व्यवस्था की गई है । हमारा ही ममचित व्यवस्था की गई है । हमारी सरकार ने इस कार्य के लिए अलग से ' खेल मन्त्रालय ' भी बनाया है । फिर भी जैसी खेल - कद और व्यायाम की व्यवस्था माध्यमिक विद्यालयों . महानिटालयों एवं विश्वविद्यालयों में होनी चाहिए वैसी अभी नहीं है । इस स्थिति में परिवर्तन आवश्यक है । यदि भनिगम में योग्य नागरिक एवं सर्वांगीण विकासयक्त शिक्षित व्यक्तियों का निमाण करना है तो शिक्षा में खेल - कूद की उपेक्षा न करके उसे व्यावहारिक रूप प्रदान करना होगा ।